105 देसी धान किस्मों को सहेजने वाले रायगढ़ के किसान भवानी शंकर पंडा का कृषि विश्वविद्यालय में सम्मान, बने प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा
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रायगढ़, 25 अक्टूबर 2026। पारंपरिक कृषि ज्ञान को सहेजने और जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले रायगढ़ जिले के किसान भवानी शंकर पंडा को प्रदेश स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में 24 अक्टूबर को आयोजित ‘चौधरी मित्रसेन समिति कृषक सम्मान’ कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त, संचालक कृषि सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और प्रदेशभर से आए किसान उपस्थित रहे।
लैलूंगा विकासखंड के ग्राम खैरबहर निवासी श्री पंडा वर्ष 2014 में मात्र दो देसी धान किस्मों से शुरुआत कर आज 105 किस्मों का संग्रह तैयार कर चुके हैं। रायगढ़, जशपुर, सरगुजा और ओडिशा तक जाकर उन्होंने दुर्लभ बीजों की तलाश की। इन पारंपरिक किस्मों को सहेजने के लिए उन्होंने अपने खेत में धान संग्रहालय बनाया है, जहां बीजों को सुरक्षित रखने के साथ छोटे-छोटे भूखंडों में खेती कर बीज संवर्धन किया जा रहा है।
श्री पंडा केवल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए धान के स्थान पर तिल की खेती का सफल प्रयोग किया है। इस वर्ष वे सात एकड़ में सुगंधित जवाफूल धान की खेती कर रहे हैं, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है।
उनके प्रयासों से न केवल विलुप्त हो रही देसी किस्में बच रही हैं, बल्कि रासायनिक खेती से हटकर जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान भी बढ़ रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि श्री पंडा का मॉडल छोटे और सीमांत किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का उदाहरण है।
सम्मान के बाद श्री पंडा ने कहा कि उनका लक्ष्य आने वाले वर्षों में 200 किस्मों तक संग्रह पहुंचाना और गांव के अन्य किसानों को जैविक खेती से जोड़ना है।
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