नारी सम्मान के बिना अधूरी है देवी उपासना, निष्काम उपासना ही सर्वोत्तम मार्ग – बाबा प्रियदर्शी राम
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अंबिकापुर। शारदीय नवरात्रि पर पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने भगवती आराधना के गूढ़ रहस्यों पर आशीर्वचन दिया। उन्होंने कहा कि समस्त स्त्रियां भगवती का स्वरूप हैं, नारी सम्मान के बिना देवी उपासना अधूरी है।
बाबा ने कहा कि असुरों ने शक्ति का दुरुपयोग किया, देवताओं ने आराधना की। शक्ति के बिना आंख खोलना भी संभव नहीं। सकाम और निष्काम उपासना के भेद को राजा सुरथ और वैश्य समाधि की कथा से समझाया। सुरथ ने सकाम उपासना से राज्य पाया, समाधि ने निष्काम भाव से मोक्ष।
उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में मनुष्य जीवन ही कर्म योनि है, इसी से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। सिद्ध कुंजिका दुर्गा सप्तशती के रहस्यों की चाबी है। भगवती की आराधना से जड़-चेतन की ग्रंथि टूटती है।
बाबा ने मंत्रों को हृदय में उतारकर सत्य के पथ पर चलने का आह्वान किया।
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