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*जयपुर POCSO विशेष अदालत का बड़ा फैसला: IPS को उम्रकैद*

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जयपुर । विशेष रिपोर्ट

पूर्व AIG अनिल मिश्रा से जुड़े पुराने जयपुर मामले को लेकर एक अदालत के फैसले की जानकारी सामने आई है। आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए पोस्टर के अनुसार, जयपुर की POCSO विशेष अदालत ने अनिल मिश्रा को महिला से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद तथा नाबालिग से अश्लील हरकत के मामले में 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

हालांकि, इस फैसले की मूल न्यायालय प्रति/आधिकारिक आदेश मुझे उपलब्ध नहीं हुआ है। इसलिए नीचे समाचार में उन्हीं तथ्यों को सावधानी से रखा गया है जो आपके भेजे पोस्टर और उपलब्ध पुराने समाचार रिकॉर्ड से समर्थित हैं।

क्या है पूरा मामला?

मामला वर्ष 2014 में सामने आया था। उस समय मध्य प्रदेश पुलिस की CID में AIG स्तर के अधिकारी रहे अनिल मिश्रा के खिलाफ जयपुर में एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे।

पुराने समाचार रिकॉर्ड के मुताबिक, महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति के खिलाफ चल रहे मामले में मदद और उसे जेल से बाहर निकलवाने का भरोसा देकर उसके साथ यौन शोषण किया गया। जयपुर के महिला थाने में जुलाई 2014 में उनके खिलाफ IPC की धारा 376 और 384 के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी उस समय सामने आई थी।

महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसकी बेटी और भतीजी की आपत्तिजनक तस्वीरें खींचीं और उनका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया। उस समय अनिल मिश्रा ने आरोपों से इनकार किया था और उन्हें निराधार बताया था।

नाबालिग से जुड़े आरोप भी सामने आए

मामले को POCSO Act से जुड़ा बताया गया है। पोस्टर के अनुसार, पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप में भी अदालत ने दोषसिद्धि की और 3 साल के कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि POCSO कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है और ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है।

अदालत के फैसले में क्या बताया गया है?

* महिला से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई।
* नाबालिग से अश्लीलता के मामले में 3 साल का कारावास दिया।
* पीड़िता के बयान को विश्वसनीय माना।
* गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्यों को महत्व दिया।
* अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध माना।

पद और प्रभाव से ऊपर कानून

इस मामले की सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि आरोपी रहे व्यक्ति पुलिस विभाग में वरिष्ठ पद पर रह चुके थे। यदि पोस्टर में दर्शाया गया फैसला आधिकारिक न्यायालय आदेश से पुष्ट होता है, तो यह मामला इस बात का उदाहरण होगा कि किसी सरकारी पद या प्रभाव के बावजूद दोष सिद्ध होने पर कानून अपना रास्ता ले सकता है।

वर्ष 2017 की रिपोर्टों में भी इस मामले को लेकर महिला द्वारा पुलिस पर आरोपी अधिकारी को संरक्षण देने के आरोप लगाए जाने का उल्लेख मिलता है, जबकि पुलिस ने उस समय आरोपों से इनकार करते हुए जांच जारी होने की बात कही थी।

लेकिन एक जरूरी तथ्य

पुराने समाचार रिकॉर्ड में वर्ष 2014 में अनिल मिश्रा के खिलाफ आरोप और FIR की पुष्टि मिलती है, लेकिन मुझे अभी ऐसा विश्वसनीय प्राथमिक स्रोत नहीं मिला जिसमें आपके पोस्टर में बताए गए उम्रकैद और 3 साल की सजा वाले अंतिम जयपुर POCSO अदालत के फैसले की पूरी पुष्टि हो। इसलिए इसे प्रकाशित करते समय “अदालत के फैसले के अनुसार” तभी लिखें जब आपके पास मूल फैसला/आदेश की प्रमाणित प्रति हो।

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