अंबिकापुर : IPS से बदसलूकी और आदिवासी समाज पर टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी पर FIR
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अंबिकापुर। अंबिकापुर के स्कूल रोड स्थित अनुपम वस्त्रालय से जुड़े विवाद में अब नया कानूनी मोड़ आ गया है। पीड़िता के संबंध में कथित आपत्तिजनक सार्वजनिक टिप्पणी तथा अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर कथित अपमानजनक बयान के आरोप में भाजपा नेता रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है शिकायत?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता सुनीता सोनहा सहित विभिन्न संगठनों ने 15 सितंबर को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप कर शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ज्ञापन के दौरान रवीन्द्र तिवारी द्वारा पीड़िता के संबंध में शंकरगढ़ में किसी दुकानदार के साथ भी पूर्व की कथित घटना का उल्लेख किया गया। शिकायतकर्ताओं ने इस दावे की सत्यता पर सवाल उठाते हुए संबंधित थाने के अभिलेखों से पुष्टि कराने की मांग की थी।
शिकायत के अनुसार, अनुसूचित जनजाति समुदाय को लेकर भी कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की गई, जिसे शिकायतकर्ताओं ने अपमानजनक और समुदाय की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला बताया। इसी आधार पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। सर्व आदिवासी समाज की महिला प्रकोष्ठ की ओर से भी कार्रवाई की मांग उठाई गई थी।
अनुपम वस्त्रालय प्रकरण का बैकग्राउंड
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 11 अगस्त 2026 की घटना के संबंध में सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 0563/2026 के तहत BNS की धारा 74 एवं 351(3) में पहले ही मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पीड़िता के पक्ष में न्याय की मांग और कथित बयानबाजी को लेकर सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया था।
कौन सी धाराओं में FIR ?
पुलिस ने FIR क्रमांक 0015/2026 में रवीन्द्र तिवारी के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3-1(r), 3-1(u), 3-1(w-ii), 3(2)(va) तथा BNS 2023 की धारा 196(1), 353(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
वहीं कलेक्ट्रेट मैदान के पीछे गेट के पास कथित गाली-गलौज, जातिगत टिप्पणी और धमकी के एक अन्य मामले में FIR क्रमांक 0702/2026 शिकायतकर्ता आकांक्षा टोप्पो की शिकायत पर आरोपी धीरज सिंह के विरुद्ध BNS की धारा 296, 351(1), 78(1) तथा SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r-s) के तहत दर्ज की गई है।
पुलिस जांच जारी, दोष सिद्ध नहीं
किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में पुलिस विवेचना, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और कानूनी जिम्मेदारी तय होगी। पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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