सूफी संगीत की मिठास और कबीर वाणी से गूंजा चक्रधर समारोह, पद्मश्री भारती बंधु की प्रस्तुति पर झूमे श्रोता, भक्ति गीतों से बांधा समां
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रायगढ़, 18 सितंबर 2026/ 41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या सूफी संगीत, कबीर वाणी और भक्ति गीतों के नाम रही। पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गणेश वंदना के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में ‘बोलो राम राम’, ‘राधे-राधे’ और ‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’ जैसे भक्ति गीतों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

भारती बंधु ने अपनी विशिष्ट शैली में कबीर के दोहे और पद प्रस्तुत किए। ‘कबीरा बिगड़ गयो राम दुहाई’, ‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाई के’, ‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी’ और ‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’ जैसी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या में संगीत की अलग-अलग परंपराओं का रंग देखने को मिला।

पांचवीं पीढ़ी से निभा रहे भक्ति संगीत की परंपरा
प्रस्तुति के दौरान डॉ. भारती बंधु ने चक्रधर समारोह से अपने पुराने जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने कहा कि वे समारोह को उसके शुरुआती दौर से जानते हैं और समय के साथ इसका स्वरूप काफी विस्तृत हुआ है। आज इसमें शामिल होना गौरव की बात है।

उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार में भक्ति संगीत की पांचवीं पीढ़ी से जुड़े हैं, जबकि उनके पुत्र छठी पीढ़ी के रूप में इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 67 वर्षीय भारती बंधु ने बताया कि वे पिछले 57 वर्षों से गायन कर रहे हैं।

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