सेवा की कहानी: कभी कर्ज की चिंता, आज पिंक ई-ऑटो से आत्मनिर्भर बनी रेशम पिंक ई-ऑटो ने बदली जिंदगी, 8-10 हजार से बढ़कर 25-30 हजार हुई आय
|
😊 Please Share This News 😊
|
रायपुर, 22 सितंबर 2026। कभी घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ता था। कारोबार में हुए नुकसान और बढ़ते कर्ज की चिंता हर महीने सामने खड़ी रहती थी। लेकिन आज पिंक ई-ऑटो चलाते हुए ग्राम बेंद्री की श्रीमती रेशम साहू न केवल परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बना रही हैं।
रायपुर जिला के विकासखंड अभनपुर के ग्राम बेंद्री निवासी श्रीमती रेशम साहू ‘कल्याणी समर्थन महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ी हैं। कुछ समय पहले तक वे पति हरीश साहू के साथ जनरल स्टोर और सिलाई का काम करती थीं। दोनों की संयुक्त मासिक आय करीब 8 से 10 हजार रुपये थी।

छोटे कारोबार से बढ़ा कर्ज
व्यवसाय बढ़ाने के लिए लिया गया 60 हजार का ऋण ब्याज सहित बढ़कर 1.83 लाख तक पहुंच गया। साथ ही 12 हजार रुपये प्रतिमाह की व्यक्तिगत ऋण किस्त का बोझ भी था।
ऐसे समय में पिंक ई-ऑटो परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने का सहारा बना।
पिंक ई-ऑटो बना नई उम्मीद का पहिया
पिंक ई-ऑटो मिलने के बाद रेशम ने खुद ऑटो चलाना शुरू किया। आज वे हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये तक कमा रही हैं। अपनी कमाई से उन्होंने बढ़ा हुआ कर्ज चुका दिया है और 12 हजार की मासिक किस्त नियमित जमा करने के साथ परिवार की जरूरतें भी बेहतर तरीके से पूरी कर रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को जमीन पर मिल रही दिशा
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। रेशम इस पहल के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से नया मॉडल
वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में नवा रायपुर अटल नगर में सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के साथ महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने के लिए ‘प्रोजेक्ट पिंक ई-ऑटो’ चलाया जा रहा है। यह पहल नवा रायपुर विकास प्राधिकरण और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के संयुक्त प्रयास से संचालित है।
92 महिलाओं को मिला साधन
प्रोजेक्ट के दोनों चरणों में अब तक 92 स्व-सहायता समूह की महिलाओं को ई-ऑटो उपलब्ध कराया गया है, जिनमें प्रथम चरण की 40 और द्वितीय चरण की 52 लाभार्थी शामिल हैं।
रेशम की कहानी बताती है कि सेवा तब सार्थक होती है, जब वह जरूरतमंद के जीवन में अवसर बनकर पहुंचे।
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |

