सेवा की कहानी: तीर-धनुष से टेक्नोलॉजी तक किसन की उड़ान दंतेवाड़ा के जंगलों से निकला पहला ग्रेजुएट, आज नवा रायपुर में IT सेक्टर में बना रहा पहचान
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रायपुर, 23 सितंबर 2026। किसने सोचा था कि जंगलों से घिरे छोटे से गांव में मवेशी चराने और तीर-धनुष चलाने वाला बच्चा एक दिन कंप्यूटर की दुनिया में भविष्य बनाएगा। यह कहानी है दंतेवाड़ा जिले के ग्राम तेलम के 23 वर्षीय किसन मंडावी की।
दंतेवाड़ा से करीब 40 किमी दूर कटेकल्याण तहसील का ग्राम तेलम जंगलों से घिरा है। गांव तक पहुंचने के लिए डंकिनी नदी पार करनी पड़ती है। करीब 200-300 घरों और एक हजार की आबादी वाले इस गांव में किसन आज उम्मीद की किरण हैं। वे गांव के पहले युवा हैं, जिन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की।
बचपन में छूटा माता-पिता का साया
किसन के बचपन में ही माता-पिता का निधन हो गया। चाचा ने परवरिश की। बचपन में स्कूल के साथ मवेशी चराना और तीर-धनुष चलाना दिनचर्या थी। पोलियो के कारण बैसाखी का सहारा लेना पड़ता था। सुविधाओं के अभाव और उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर जाना चुनौती थी, फिर भी किसन ने हार नहीं मानी।
गोंडी-हल्बी से शुरू हुआ सफर
किसन की शुरुआती दुनिया गोंडी और हल्बी भाषा तक सीमित थी। गांव से प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई जवांगा एजुकेशन सिटी से की, जहां हिंदी और अंग्रेजी सीखी और पहली बार कंप्यूटर से परिचित हुए। रुचि बढ़ी और कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया। आज वे नवा रायपुर में हैदराबाद की कंपनी स्क्वायर बिजनेस में IT सेक्टर में काम कर रहे हैं।
दूर गांव से निकला युवा, अब अपने ही राज्य में रोजगार
यह बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में युवाओं के लिए रोजगार-स्वरोजगार बढ़ाने पर जोर है। वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विजन के अनुरूप नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक सुविधाओं, निवेश और रोजगार के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। किसन को अपने सपनों के लिए दूसरे राज्य जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
जहां कभी बाहर जाने का डर था, वहीं शिक्षा ने दिखाई राह
नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बाहर पढ़ने जाने पर सुरक्षा की चिंता भी थी, लेकिन शिक्षा की इच्छा बड़ी थी।
किसन कहते हैं – अब सपनों के लिए बाहर जाना जरूरी नहीं
किसन कहते हैं, नवा रायपुर में IT क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, राज्य के अलग-अलग जिलों के युवा यहां काम कर रहे हैं। आने वाले समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा यहां आएंगे।
नवा रायपुर में दिखता है अपना दंतेवाड़ा
हरियाली और साफ हवा दंतेवाड़ा की याद दिलाती है। सेंध लेक पर सूर्यास्त, जंगल सफारी और ट्राइबल म्यूजियम उन्हें घर जैसा एहसास कराते हैं।
अब AI के जरिए मातृभाषा को जोड़ने का सपना
किसन का सपना ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने का है, जिससे दिल्ली में बैठा व्यक्ति हिंदी/अंग्रेजी में बोले तो दंतेवाड़ा के गांव में बैठा व्यक्ति उसे गोंडी या हल्बी में रियल टाइम समझ सके।
आदिवासी बेटियां भी आगे बढ़ें
किसन चाहते हैं कि आदिवासी समाज की बेटियां भी शिक्षा से आगे बढ़ें, लड़के-लड़कियों में भेदभाव न हो।
तीर से टेक्नोलॉजी तक – बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर
जहां बचपन में हाथ में तीर-धनुष था, आज उसी हाथ में तकनीक है। जहां हिंदी समझना चुनौती थी, आज अंग्रेजी और तकनीकी ज्ञान के साथ IT क्षेत्र में पहचान बना रहे हैं।
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