*दिल्ली की मऊमाला नायक ने कथक की भाव-भंगिमाओं से चक्रधर समारोह में बांधा समां, गणेश वंदना से धमार तक दिखी विविध छटा*
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41वें चक्रधर समारोह की तीसरी संध्या: दिल्ली की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मऊमाला नायक की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

रायगढ़, 16 सितम्बर 2026 / 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की तीसरी सांस्कृतिक संध्या सुर, ताल और लय के मनोहारी संगम से सजी। देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कलाकारों ने नृत्य और संगीत की विविध विधाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। इसी क्रम में दिल्ली की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना मऊमाला नायक ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों और मनमोहक भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मऊमाला नायक ने अपने दल की साथी नृत्यांगनाओं नीतू कुमारी, निशा रॉय, अर्चना शर्मा एवं विदुषी सिंह के साथ विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की वंदना से प्रस्तुति का शुभारंभ किया। इसके बाद भाव-अभिनय के माध्यम से तुलसीदास एवं रत्नावली की भावपूर्ण कथा को कथक की अभिव्यक्ति में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में चतुरंग की प्रस्तुति ने भी विशेष आकर्षण पैदा किया। राग मालगुंजी और तीनताल पर आधारित इस प्रस्तुति में सरगम, नृत्य, तराना और वाद्य के बोल का सुंदर एवं संतुलित समावेश देखने को मिला।
इसके पश्चात कथक के शुद्ध तकनीकी पक्ष को उजागर करते हुए 14 मात्राओं की धमार ताल में उठान, तिपल्ली आमद, चक्रदार तोड़ा, सादा परन, तिहाई और बाँट जैसी कठिन एवं पारंपरिक बंदिशों की प्रस्तुति दी गई। नृत्य की सधी हुई लयकारी, भाव-भंगिमाओं और पद संचालन ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
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