चक्रधर समारोह में भूपेन्द्र साहू की प्रस्तुति में दिखी छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की रंगीन छटा
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रायगढ़, 16 सितम्बर 2026/ अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 41वें चक्रधर समारोह-2026 की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के इंद्रधनुषी रंग बिखरे। गरियाबंद के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कलाकार भूपेन्द्र साहू और उनकी टीम ‘रंग सरोवर’ ने लोककला से सजी भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रस्तुति की शुरुआत ‘हमन नारी आवन वो, सबके महतारी आवन ग’ से हुई, जिसमें नारी शक्ति के भाव को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’, भोजली गीत, सुवा गीत एवं नृत्य ने मंच पर छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की जीवंत झलक दिखाई।
बाबा गुरु घासीदास के समता और मानवता के संदेशों को पंथी नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, वहीं कर्मा और ददरिया की प्रस्तुतियों ने लोकजीवन के सहज, आत्मीय और श्रृंगारिक रंगों को जीवंत किया। श्रीराम स्तुति ने भक्ति का भाव जगाया, तो तीज-त्योहारों पर आधारित ददरिया गीतों ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा।
कौन हैं भूपेन्द्र साहू?
भूपेन्द्र साहू लंबे समय से रंगमंच, लोककला और संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मध्यप्रदेश रंगमंडल, भारत भवन भोपाल से जुड़े रहे हैं और देश-विदेश के अनेक वरिष्ठ रंग निर्देशकों के साथ कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2006 में उन्होंने ‘रंग सरोवर’ छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कला मंच की स्थापना की। इस मंच के माध्यम से अब तक छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में लगभग 1000 मंचीय प्रस्तुतियां दी जा चुकी हैं। भरथरी के नाट्य रूपांतरण एवं जनजातीय संस्कृति पर उनका शोध कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
समारोह में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह और सुश्री उर्वशी देवी ने भूपेन्द्र साहू को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
फोटो गैलरी: रंग सरोवर की रंगीन छटा







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