* डॉ. पायल साहू की लोकगायिकी से सराबोर हुई चक्रधर समारोह की तीसरी शाम, छत्तीसगढ़ी संस्कृति की बिखरी छटा*
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‘चिन्हारी लोक मंजीरा’ के कलाकारों के साथ दी प्रस्तुति, ‘अरपा पैरी के धार’ से लेकर कर्मा गीतों तक झूमे दर्शक

रायगढ़ 16 सितंबर 2026 : अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 41वें चक्रधर समारोह-2026 की तीसरी सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के नाम रही। प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ. पायल साहू ने ‘चिन्हारी लोक मंजीरा’ के कलाकारों के साथ अपनी सुमधुर प्रस्तुति से समां बांध दिया।
डॉ. साहू ने अपने गायन की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी के वंदन गीत ‘अरपा पैरी के धार’ से की। इसके पश्चात गणपति जगवंदन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। 
कार्यक्रम में उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को जीवंत करते हुए बिहाव गीत ‘बही बना दिए’, ‘मात गे हे बगिया म फूल’, ‘तोर मन कैसे लागे राजा’ और कर्मा गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी मधुर आवाज, छत्तीसगढ़ी भाषा की मिठास और पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की संगत ने समारोह स्थल के माहौल को पूरी तरह छत्तीसगढ़ीमय बना दिया।

‘चिन्हारी लोक मंजीरा’ के कलाकारों ने दाऊ महासिंह चंद्राकर और दाऊ प्रेम चंद्राकर की लोक संगीत परंपरा को मंच पर जीवंत किया। दर्शकों ने तालियों के साथ पूरी प्रस्तुति का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
इस मनमोहक प्रस्तुति के साथ ही चक्रधर समारोह के तीसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या का यादगार समापन हुआ।
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