* कम जगह और कम लागत में पैरा मशरूम उत्पादन से बढ़ेगी आमदनी, 100 किलो गीले पुआल से 12 से 15 किलो तक उत्पादन*
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रायगढ़, 10 सितंबर 2026/ कम जगह, कम लागत और कम समय में मशरूम उत्पादन किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आमदनी का बेहतर जरिया बन सकता है। खासकर पैरा मशरूम के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं, घर की खाली या छायादार जगह में भी खेती की जा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ की वैज्ञानिक डॉ. मनीषा चौधरी एवं दीपमाला लकड़ा ने बताया कि स्थानीय बाजार में अच्छी मांग होने से इसे छोटे स्तर पर शुरू किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ की जलवायु में जून से अक्टूबर तक का समय पैरा मशरूम के लिए उपयुक्त है। 30 से 36 डिग्री तापमान और 90 से 95 प्रतिशत आर्द्रता अनुकूल रहती है।
उत्पादन विधि:
100 सेमी लंबी, 60 सेमी चौड़ी और 15 सेमी ऊंची क्यारी तैयार करें। धान के सूखे पुआल को 7-8 सेमी मोटे और 70-80 सेमी लंबे बंडलों में बनाकर साफ पानी में 12 से 16 घंटे भिगोएं। उपचार के लिए पानी में 2 प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट मिलाएं, फिर अतिरिक्त पानी निकाल दें।
बांस या लकड़ी के रैक पर पुआल की 4 से 5 परतें लगाएं और हर परत पर बीज (स्पॉन) डालें। पॉलीथिन से ढक दें। 6 से 8 दिन में मायसीलियम फैलने पर पॉलीथिन हटा दें। सूखने पर हल्का पानी छिड़कें।
स्पॉन डालने के 10 से 12 दिन बाद मशरूम निकलना शुरू होता है। टोपी खुलने से पहले तुड़ाई करें। एक बार शुरू होने पर 10 से 12 दिन तक उत्पादन मिलता है।
100 किलो गीले पुआल से 12 से 15 किलो तक पैरा मशरूम मिल सकता है। पानी अधिक होने से इसे तुरंत उपयोग या बिक्री करना उचित है। बचा हुआ पुआल जैविक खाद के रूप में उपयोग हो सकता है।
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