*मनरेगा से खेतों में लौटी हरियाली कुंआ निर्माण ने बदली किसान मार्शल की तकदीर* – Chhattisgarh Top News

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*मनरेगा से खेतों में लौटी हरियाली कुंआ निर्माण ने बदली किसान मार्शल की तकदीर*

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रायगढ़, 17 सितम्बर 2025/ कभी पानी की कमी से जूझती धरमजयगढ़ विकासखण्ड के आमापाली के किसान श्री मार्शल उर्फ छोटेया के 2.5 एकड़ बंजर जमीन, आज हरियाली से लहलहा रही है। यह बदलाव मुमकिन हो सका है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत व्यक्तिगत कुंआ निर्माण से, जिसने किसान श्री मार्शल के जीवन की दिशा ही बदल दी।
सीमित फसलें, कम उत्पादन और आय का अभाव उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को कमजोर बना रहा था। किसान श्री मार्शल की कृषि भूमि वर्षा पर पूरी तरह निर्भर थी। तब उनकी किस्मत ने करवट ली, जब मनरेगा योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत आमापाली में उनके खेत में कुंआ निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ। इस कार्य के लिए 2.54 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति मिली, जिसमें 90 हजार रुपये मजदूरी तथा 1.64 लाख रुपये सामग्री मद में व्यय किए गए।
कुंआ निर्माण के पश्चात किसान श्री मार्शल ने अपने खेत में मक्का, धान, मूंगफली और सब्जियों की खेती शुरू की। गर्मी के मौसम में मूंगफली से हुई आमदनी ने उनकी आर्थिक दशा को सुधार दिया। सिंचाई की सुविधा मिलने से फसलों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और अब उन्हें सालाना लगभग 40 हजार रुपए की अतिरिक्त आय हो रही है। इतना ही नहीं, अब उनके पास पीने योग्य स्वच्छ जल भी उपलब्ध है और वह सालभर खेती कर पा रहे हैं। कुंआ निर्माण कार्य में हितग्राही के परिवार के 5 सदस्य सहित 20 अन्य जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को रोजगार मिला। इस कार्य के सफल क्रियान्वयन में सरपंच श्री उमेद सिंह राठिया, सचिव श्री पंचराम राठिया, ग्राम रोजगार सहायक श्रीमती अनीता गुप्ता और तकनीकी सहायक सुश्री संगीता मिंज की भूमिका सराहनीय रही।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने कृषक श्री मार्शल
श्री मार्शल की सफलता ने ग्राम पंचायत आमापाली के अन्य किसानों को भी प्रेरित किया है। ग्राम आमापाली के अन्य ग्रामीणों द्वारा मनरेगा अंतर्गत चार और व्यक्तिगत कुंआ निर्माण कार्यों की माँग की गई, जिन्हें प्रशासन द्वारा स्वीकृति मिल चुकी है। ग्रामीणों ने शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने न केवल ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया, बल्कि उन्हें कृषि के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया।

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