*मुंबई के सुविख्यात बांसुरी वादक मोहित शास्त्री की मधुर धुनों से गूंजा सभागार*
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मुंबई से पधारे सुविख्यात बांसुरी वादक मोहित शास्त्री ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा। शास्त्री ने शास्त्रीय रागों और पारंपरिक धुनों से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी बांसुरी से निकली मधुर तानें सुर, ताल और लय का ऐसा संगम रच रही थीं कि दर्शक भावविभोर होकर झूम उठे। लोकधुनों को शास्त्रीय रंग में पिरोकर उन्होंने अपनी कला का अनूठा परिचय दिया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गडग़ड़ाहट से सराहा।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मैया मोरी मैं नहीं माखन खाओ, यशोमती मैया से बोले नंदलाला, श्याम तेरी बंसी पुकारे, दिल दीवाना, कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, चल अकेला चल अकेला और डपली वाले डपली बजा जैसे भजनों और लोकप्रिय गीतों को बांसुरी की मधुर ध्वनियों से प्रस्तुत कर समां बांध दिया। दर्शक भी भावनाओं में डूबकर धुनों के साथ गुनगुनाने लगे, जिससे वातावरण भक्तिरस और सुरमय आनंद से गूंज उठा। बता दे कि मोहित शास्त्री को संगीत साधना की प्रेरणा बचपन में अपनी दादी और पिता से मिली।
बचपन में ही उन्हें बांसुरी से गहरा लगाव हुआ और धीरे-धीरे यह उनका जीवन का साधन और साध्य बन गया। आज वे देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संगीत की गरिमा को बढ़ा रहे हैं और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। चक्रधर समारोह की इस संध्या में उनकी टीम ने भी उत्कृष्ट संगति दी, जिससे प्रस्तुति और भी प्रभावशाली बन पड़ी। बांसुरी की गूंज और तालियों की प्रतिध्वनि से पूरा समारोह स्थल देर तक सराबोर रहा।
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