कौन हैं राजस्थान के किसान दंपति, जिन्हें लाल किला के स्वतंत्रता दिवस समारोह में स्पेशल गेस्ट बनाया गया
|
😊 Please Share This News 😊
|
राजस्थान के एक किसान दंपति को 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनके अलावा राज्य के चार ग्राम प्रधानों को भी आमंत्रित किया गया है। आइए जानते हैं इस दंपति और……
राजस्थान के एक किसान दंपति को 15 अगस्त को लाल किले पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनके अलावा राज्य के सीमावर्ती गांवों के चार ग्राम प्रधानों (सरपंचों) को भी विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। आइए जानते हैं इस दंपति और कृषि में दिए गए उनके योगदान के बारे में।
बाड़मेर जिले की बाटाडू तहसील के देवाराम पंवार और उनकी पत्नी धापू को पारंपरिक खेती को औषधीय फसलों और आधुनिक पशुपालन के साथ जोड़ने में उनके कार्य के लिए यह सम्मान मिला है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
किसान देवाराम पंवार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाकर उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है। उन्होंने अन्य किसानों के साथ इसकी जानकारी शेयर करके उन्हें नवीन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह दंपति कई सालों से पारंपरिक और औषधीय फसलों की खेती के साथ-साथ पशुपालन भी कर रहा है।
ये भी पढ़ें:
सेहत बिगड़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बढ़ाई आसाराम की जमानत अवधि
पंवार के अनुसार, वे सीमावर्ती जिले में गुग्गुल (कॉमीफोरा वाइटी) की खेती करने वाले एकमात्र किसान हैं। साथ ही राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत राज्य के पहले लाभार्थी भी हैं। उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।
उनकी औषधीय फसलों की पैदावार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों ने देश भर के किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ शेयर करके उनकी प्रगति में भी योगदान दिया है।
भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0 में पहली बार राजस्थान के सीमावर्ती गांवों के चार सरपंच भी शामिल होंगे। आमंत्रित लोगों में म्याजलार (जैसलमेर) की गीता कंवर, नवातला भाखासर (बाड़मेर) के भरत राम, कंवरपुरा (श्रीगंगानगर) की शकुंतला और खाजूवाला तहसील (बीकानेर) के 22 केवाईडीपी गांव की सजना शामिल हैं। सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
बाड़मेर जिले की बाटाडू तहसील के देवाराम पंवार और उनकी पत्नी धापू को पारंपरिक खेती को औषधीय फसलों और आधुनिक पशुपालन के साथ जोड़ने में उनके कार्य के लिए यह सम्मान मिला है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
किसान देवाराम पंवार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाकर उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है। उन्होंने अन्य किसानों के साथ इसकी जानकारी शेयर करके उन्हें नवीन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह दंपति कई सालों से पारंपरिक और औषधीय फसलों की खेती के साथ-साथ पशुपालन भी कर रहा है।
ये भी पढ़ें:
सेहत बिगड़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने बढ़ाई आसाराम की जमानत अवधि
पंवार के अनुसार, वे सीमावर्ती जिले में गुग्गुल (कॉमीफोरा वाइटी) की खेती करने वाले एकमात्र किसान हैं। साथ ही राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत राज्य के पहले लाभार्थी भी हैं। उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।
उनकी औषधीय फसलों की पैदावार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों ने देश भर के किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ शेयर करके उनकी प्रगति में भी योगदान दिया है।
भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0 में पहली बार राजस्थान के सीमावर्ती गांवों के चार सरपंच भी शामिल होंगे। आमंत्रित लोगों में म्याजलार (जैसलमेर) की गीता कंवर, नवातला भाखासर (बाड़मेर) के भरत राम, कंवरपुरा (श्रीगंगानगर) की शकुंतला और खाजूवाला तहसील (बीकानेर) के 22 केवाईडीपी गांव की सजना शामिल हैं। सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
किसान देवाराम पंवार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी ढंग से लाभ उठाकर उन्होंने अपनी आय बढ़ाई है। उन्होंने अन्य किसानों के साथ इसकी जानकारी शेयर करके उन्हें नवीन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह दंपति कई सालों से पारंपरिक और औषधीय फसलों की खेती के साथ-साथ पशुपालन भी कर रहा है।
पंवार के अनुसार, वे सीमावर्ती जिले में गुग्गुल (कॉमीफोरा वाइटी) की खेती करने वाले एकमात्र किसान हैं। साथ ही राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत राज्य के पहले लाभार्थी भी हैं। उन्होंने अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।
उनकी औषधीय फसलों की पैदावार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों ने देश भर के किसानों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ शेयर करके उनकी प्रगति में भी योगदान दिया है।
भारत सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0 में पहली बार राजस्थान के सीमावर्ती गांवों के चार सरपंच भी शामिल होंगे। आमंत्रित लोगों में म्याजलार (जैसलमेर) की गीता कंवर, नवातला भाखासर (बाड़मेर) के भरत राम, कंवरपुरा (श्रीगंगानगर) की शकुंतला और खाजूवाला तहसील (बीकानेर) के 22 केवाईडीपी गांव की सजना शामिल हैं। सरकार जोधपुर से दिल्ली तक उनकी हवाई यात्रा की व्यवस्था करेगी।
|
व्हाट्सप्प आइकान को दबा कर इस खबर को शेयर जरूर करें |

