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*चार दशक की तपस्या को मिला सम्मान:- बस्तर के ‘सेवा दंपति’ डॉ. गोडबोले को पद्मश्री 2026, ओपी चौधरी ने दी बधाई*

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रायगढ़:- वित्त मंत्री रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने बस्तर के नक्सल प्रभावित आदिवासी अंचलों में 40 वर्षों से अधिक समय तक निस्वार्थ स्वास्थ्य सेवा देने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले को पद्मश्री 2026 सम्मान मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। ओपी चौधरी ने इस दम्पति द्वारा की गई सेवा को बस्तर की आत्मा को छूने वाली सेवा निरूपित करते हुए कहा डॉ. गोडबोले दंपति ने वह कर दिखाया जो सरकारें दशकों में नहीं कर पाईं. जहां स्वास्थ्य सुविधाएं नाममात्र थीं, जहां पहुंचना जोखिम भरा था, वहां इन्होंने अपना घर-परिवार छोड़कर आदिवासी भाइयों-बहनों की सेवा को जीवन का ध्येय बना लिया. यह पद्मश्री नहीं, बस्तर की लाखों दुआओं का सम्मान है। इस दंपति की सेवा का इतिहास बताते हुए कहा यह सेवा यात्रा अबूझमाड़ से शुरू हुई।
1980 के दशक में महाराष्ट्र से आए डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले ने नारायणपुर जिले के रामकृष्ण मिशन आश्रम, अबूझमाड़ से सेवा शुरू की. बाद में इन्होंने ‘शबरी सेवा संस्थान’ के माध्यम से दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा के सबसे दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य शिविर, कुपोषण उन्मूलन केंद्र और मातृ-शिशु देखभाल कार्यक्रम चलाए। कुपोषण के खिलाफ जंग का योद्धा बताते हुए श्री चौधरी ने कहा बस्तर में कुपोषण दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी थी।गोडबोले दंपति ने ‘घर-घर पोषण, हर बच्चा रोशन’ अभियान चलाकर हजारों बच्चों को कुपोषण से बाहर निकाला। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध महुआ, कोदो-कुटकी से पोषण आहार तैयार कर माताओं को प्रशिक्षित किया।आज उनके मॉडल को राज्य सरकार ने भी अपनाया है। स्वास्थ्य के साथ साथ शिक्षा और स्वावलंबन के संबंध में किए गए साहसिक प्रयासों के संबंध में श्री चौधरी ने बताया ये दंपति सिर्फ डॉक्टर नहीं, समाज सुधारक हैं. इन्होंने आदिवासी युवाओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाया, महिलाओं को मितानिन प्रशिक्षण दिया, जड़ी-बूटी आधारित उपचार को बढ़ावा दिया. नक्सल आतंक के बीच भी इन्होंने बंदूक की जगह स्टेथोस्कोप पर भरोसा रखा।
इस दंपति को छत्तीसगढ़ का गौरव, भारत की प्रेरणा बताते हुए ओपी ने कहा जब पूरा देश बस्तर को समस्या के रूप में देखता था, तब गोडबोले परिवार ने सेवा कर इसका समाधान किया। इनकी तपस्या बताती है कि सच्ची राष्ट्रसेवा वातानुकूलित कमरों से नहीं, जंगलों-झाड़ियों के बीच जाकर आदिवासियों की सेवा से होती है।नई पीढ़ी के डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी इसे अनुपम मिशाल बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने ‘गुमनाम नायकों’ को पहचान देने का जो संकल्प लिया है, पद्मश्री से सम्मानित गोडबोले दंपति उसका सबसे उज्ज्वल उदाहरण हैं। छत्तीसगढ़ आज गौरवान्वित है।श्री चौधरी ने शुभकामना संदेश में ईश्वर से प्रार्थना करते हुए डॉ. गोडबोले और सुनीता जी के स्वस्थ दीर्घायु रहने की कामना की है।

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