*शिक्षक पिता के चालीस वर्षीय सेवा से रिटायरमेंट पर भावुक हुए जिला भाजयुमो अध्यक्ष सुमीत शर्मा* – Chhattisgarh Top News

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*शिक्षक पिता के चालीस वर्षीय सेवा से रिटायरमेंट पर भावुक हुए जिला भाजयुमो अध्यक्ष सुमीत शर्मा*

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रायगढ़ :- सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को अपना राजनीतिक गुरु मानते है और स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जशपुर के स्वर्गीय देवकी महाराज को अपना गुरु मानते थे। स्वर्गीय देवकी महाराज की बेटी अनिता का विवाह उमेद कुमार शर्मा के साथ हुआ। पेशे से शिक्षक उमेद शर्मा के चालीस वर्षीय सेवा से भावुक उनके बेटे जिला भाजयुमो अध्यक्ष सुमीत शर्मा ने सोशल मंच पर विचार साझा करते हुए भावुक हो गए और कहा पापा आप 40 साल की सेवा के बाद आज सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए,आपके संघर्षों को प्रणाम करता हूँ, मेरे भीतर जो भी संस्कार हैं, वो आपकी ही देन हैं। काम के प्रति आपकी अटूट श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण को मैंने बचपन से देखा है और अब अपनी जिंदगी में उन्हीं आदर्शों को जीने की कोशिश कर रहा हूँ। एक शिक्षक के रूप में आपने पूरे जीवन भर दूसरों का भविष्य संवारा, और एक पिता, पति व परिवार के मुखिया के रूप में आपने अपना शत प्रतिशत समय दिया है। आपने बिना थके हमारे लिए जो मेहनत की, हम उसके लिए हमेशा आपके ऋणी रहेंगे। सुमीत शर्मा ने पिता की झलक कविता की पंक्तियों में देखने की बात कही।

पिता जीवन है, संबल है, शक्ति है,
पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है।
पिता अंगुली पकड़े बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा, कभी खारा है।
पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता धौंस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है।
पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है,
पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है।
पिता अप्रदर्शित, अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतजार है।
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं।

उमेद कुमार शर्मा का जन्म एडु (चन्द्रशेखरपुर) में 01 अप्रैल 1964 को हुआ। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा कोड़ातराई, (रायगढ़) से प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा पी.डी. कॉमर्स कॉलेज रायगढ़ से पूर्ण की। समाजशास्त्र विषय में आपने स्नातकोत्तर उपाधि स्व. अध्यायी छात्र के रूप में अर्जित की। शिक्षा के क्षेत्र में आपकी सेवाएँ अत्यंत सराहनीय एवं अनुकरणीय रही है। दिनांक 24 दिसम्बर 1986 को जशपुर विकासखण्ड के कन्या प्राथमिक शाला सिटोंगा में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी शासकीय सेवा प्रारंभ की तत्पश्चात अक्टूबर 1992 में खरसिया विकासखण्ड के प्राथमिक शाला दर्रामुड़ा में तथा अगस्त 1999 में माध्यमिक शाला पामगढ़ में अपनी सेवाएँ प्रदान की। दिनांक 04 अगस्त 2016 को शासकीय पूर्व माध्यमिक आश्रम शाला कुकरीझरिया में कार्यभार ग्रहण किया। जहाँ उन्होंने कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित एवं समर्पित सेवाओं से संस्था को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सरलता विनम्रता एवं विद्यार्थियों के प्रति स्नेह भाव सदैव प्ररेणादायी रहा है। उनके शिक्षकीय जीवन में न केवल विद्यार्थियों को शिक्षित किया बल्कि उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनने की प्ररेणा भी दी। दिनांक 31 मार्च 2026 को आप अपनी दीर्घकालीन शासकीय सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए। उनका पारिवारिक जीवन भी उतना ही समृद्ध एवं प्ररेणादायक है। धर्मपत्नि अनिता शर्मा एवं उनके तीन सुपुत्र मनीष शर्मा, अमित शर्मा एवं सुमित शर्मा के साथ आपका भरा पूरा परिवार बैकुण्ठपुर (रायगढ़) में निवासरत है। परिवार में बहुएँ एवं नाती-पोते भी है, जो जीवन को और अधिक खुशहाल बनाते हैं।

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