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* ‘राष्ट्र प्रथम’ से ‘विश्व पटल’ तक की यात्रा भारतीय जनता पार्टी क़ा स्थापना दिवस -: गणेश अग्रवाल *

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6 अप्रैल, 1980 को नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में जब भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी गई थी, तब अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भविष्यवाणी की थी— “अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।” आज साढ़े चार दशकों के बाद, यह दल न केवल भारत का, बल्कि विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बन चुका है।

एकात्म मानववाद और अंत्योदय
भाजपा की यात्रा महज चुनावी जीत की कहानी नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट विचारधारा की यात्रा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को आधार बनाकर इस दल ने राजनीति में ‘अंत्योदय’ (अंतिम व्यक्ति का उदय) को अपना लक्ष्य बनाया। ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ इसका प्राणतत्व रहा है।

शून्य से शिखर तक का संघर्ष
भारतीय राजनीति के इतिहास में भाजपा का उदय अभूतपूर्व है। 1984 के लोकसभा चुनावों में मात्र 2 सीटों पर सिमट जाने वाली पार्टी ने अपने धैर्य और कार्यकर्ताओं के परिश्रम से 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। जनसंघ से लेकर भाजपा तक का सफर वैचारिक प्रतिबद्धता और सांगठनिक दृढ़ता का उदाहरण है।

निर्णायक नेतृत्व और युगांतरकारी निर्णय
अटल-आडवाणी के युग ने जहाँ पार्टी को सर्वसमावेशी बनाया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने ‘संकल्प से सिद्धि’ के मंत्र को साकार किया। पिछले एक दशक में पार्टी ने उन मुद्दों को हल किया जो दशकों से ठंडे बस्ते में थे:

*अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण: ‘एक विधान, एक निशान, एक प्रधान’ के सपने को पूरा करना।
* श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण: सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त करना।
* डिजिटल और बुनियादी ढांचा: आधुनिक भारत की नींव को मजबूत करना।

संगठन ही सेवा
भाजपा की सबसे बड़ी शक्ति इसका अनुशासित कार्यकर्ता तंत्र है। ‘पन्ना प्रमुख’ से लेकर ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ तक, यहाँ संगठन को व्यक्ति से ऊपर और राष्ट्र को दल से ऊपर रखने की परंपरा है। आपदा के समय ‘सेवा ही संगठन’ के माध्यम से इस दल ने यह सिद्ध किया कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि लोक-कल्याण का उपकरण है।

आज स्थापना दिवस पर भाजपा न केवल अपनी उपलब्धियों का उत्सव मना रही है, बल्कि 2047 के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के साथ यह यात्रा अब एक नए भारत के निर्माण की ओर बढ़ रही है।

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