डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा ने कथक में शिव स्तुति, गंगा अवतरण सहित विभिन्न प्रतीतियों से किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध
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राजनांदगाँव के प्रख्यात कथक कलाकार डॉ. कृष्ण कुमार सिन्हा और उनकी टीम ने नृत्य की अद्भुत छटा बिखेरी। कथक की विविध झलकियों से सजे मंच पर उन्होंने शिव स्तुति, शिव तांडव, गंगा अवतरण, रायगढ़ एवं जयपुर घराना, लखनऊ घराने की छटा, तोड़ा, तराना, जुगलबंदी, नाव की गत और अष्ट नायिका जैसी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भाव-भंगिमाओं की जीवंतता और लय की गहराई ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। डॉ. सिन्हा ने कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि संस्कृति, साधना और जीवन मूल्यों का जीवंत प्रतिबिंब है। चक्रधर समारोह केवल मंचीय कला नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोडऩे वाली अमर धारा है।
बता दे कि डॉ.कृष्ण कुमार सिन्हा का जन्म 12 दिसंबर 1960 को राजनांदगाँव में हुआ था।
बचपन से ही नृत्य के प्रति गहरे लगाव ने उन्हें कथक की साधना की ओर प्रेरित किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बी.ए., एम.ए. और कथक नृत्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। लोक कला के प्रति गहरी रुचि रखते हुए उन्होंने मात्र 15 वर्ष की आयु में ‘चंदेनी गोंदा’ नामक लोक कलाकार समूह से जुड़कर छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य और गीतों को नई पहचान दिलाई। वे अपने गुरु श्री खुमान लाल साव को जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं, जिनसे उन्होंने लोकगीत और लोकनृत्य की प्रेरणा प्राप्त की। कला साधना को विस्तार देते हुए उन्होंने चक्रधर कथक कल्याण केंद्र, राजनांदगाँव और संगीत महाविद्यालय, ग्राम सांकरा की स्थापना की। इसके साथ ही वे समारोहों और सेमिनारों के माध्यम से युवाओं को कौशल उन्नयन और कैरियर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। कला जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए शासन और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है। डॉ. सिन्हा ने लगातार 20 वर्षों से छत्तीसगढ़ के दुर्गम क्षेत्रों में लोक कलाओं के माध्यम से जनजागरूकता फैलाने का कार्य किया है।
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