Raigarh News : भंडारण नहीं, खनिपट्टा की अवधि खत्म लेकिन चल रहा कारोबार, क्रशर संचालक के इशारों पर नाच रहा खनिज विभाग, खनिज अधिकारी कार्रवाई के बजाय दबा रहे मामला – Chhattisgarh Top News

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Raigarh News : भंडारण नहीं, खनिपट्टा की अवधि खत्म लेकिन चल रहा कारोबार, क्रशर संचालक के इशारों पर नाच रहा खनिज विभाग, खनिज अधिकारी कार्रवाई के बजाय दबा रहे मामला

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छत्तीसगढ़ टॉप न्यूज़ रायगढ़। ढेरों खामियों के बावजूद एक क्रशर संचालक पर खनिज विभाग की मेहरबानी बरसती ही जा रही है। क्रशर का भंडारण लाइसेंस नहीं है और खनिपट्टे की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन लालाधुरवा के कृष्णा बिल्डकॉन को खुली छूट दी गई है। कहा जा रहा है कि खनिज विभाग को क्रशर संचालक अपने इशारों पर नचा रहा है।
खनिज विभाग की सांठगांठ से बिना अनुमति के भी क्रशर को चलाया जा सकता है, खनिपट्टा अवधि समाप्त होने के बाद भी अवैध खदानों से पत्थर निकालने की छूट मिलती है। गिट्टी बेचने के लिए रॉयल्टी पर्ची भी दूसरे के माध्यम से दिलाया जा रहा है। यह सब लालाधुरवा में स्थापित क्रशर के लिए किया जा रहा है। क्रशर संचालक का सारंगढ़ तहसील अंतर्गत लालाधुरवा में कृष्णा बिल्डकॉन नामक क्रशर है। इस नाम से लाइमस्टोन खनिपट्टा स्वीकृत किया गया था। 11 फरवरी 2012 से 10 फरवरी 2022 तक दस साल के लिए 1.595 हे. में खनिपट्टा स्वीकृत किया गया था। इसमें क्रशर भी संचालित था । एक क्रशर यूनिट स्वीकृत क्षेत्र के बाहर भी संचालित किया जा रहा था। लीज अवधि समाप्त होने के बाद क्रशर संचालक ने खनिपट्टा का नवीनीकरण या लीज एक्स्टेंशन का आवेदन नहीं किया, तब से क्रशर और खदान दोनों को बंद बताया जा रहा है।

जबकि खनिज विभाग की सरपरस्ती में क्रशर को चालू कर लिया जाता है। सड़क निर्माण का ठेका भी क्रशर संचालक को मिला है जहां अवैध खनन से मिली गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है खनिज अधिकारी योगेंद्र सिंह भी क्रशर संचालक के सामने नतमस्तक नजर आते हैं। अभी तक उनके खदान का क्लोजर नहीं हुआ है। माइनिंग प्लान के विरुद्ध काम किया गया है लेकिन इसकी एक भी जांच नहीं हुई।

खदान से कितना हुआ उत्पादन, कितनी रॉयल्टी जारी
क्रशर संचालक के खनिपट्टा की लीज खत्म हो चुकी है। इसी जमीन पर अब भंडारण लाइसेंस मांगा जा रहा है। लेकिन लाइमस्टोन खदान से उत्पादन का कोई असेसमेंट ही नहीं हो सका है। सवाल यह भी है कि जिस जमीन पर लाइमस्टोन खुदाई होगी वहां भंडारण कैसे दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि क्रशर संचालक के खदान से चूना पत्थर के उत्पादन का कोई हिसाब ही नहीं है। अगर उत्पादन की जांच की जाएगी तो रॉयल्टी पर्ची व विक्रय से मिलान ही नहीं हो पाएगा। खनिज अधिकारी योगेंद्र सिंह ने क्रशर संचालक के क्रशर की कई जानकारियां दबाई हैं।

ट्रिगर जांच का भी है आदेश
स्वीकृत खनिपट्टों के आसपास की निजी और शासकीय जमीनों पर भी अवैध खदानें चल रही हैं । डोलोमाइट की 11 और लाइमस्टोन की एक माइंस की ट्रिगर जांच के आदेश दिए गए थे। इसमें क्रशर संचालक का लालाधुरवा स्थित खदान भी है। दरअसल, क्रशर संचालक ने आसपास की जमीनों पर भी खनन कर पत्थर निकाले हैं। क्रशिंग के बाद गिट्टी बेचकर करोड़ों कमाए । सैटेलाइट इमेज से इसकी जानकारी मिली तो ट्रिगर जांच का आदेश दिया गया । खनिज अधिकारी ने यह आदेश भी दबाया।

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