कांग्रेस का लोकतंत्र प्रेम ढोंग है, असली वोट चोर तो नेहरू-गांधी परिवार ही है – दीवान का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, कहा चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगने से नहीं रुकेगी कांग्रेस की हार
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रायगढ़। वोट चोरी के झूठे आरोपों पर कांग्रेस के कलेक्ट्रेट घेराव को नौटंकी बताते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष अरुण धर दीवान ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर लोकतंत्र की दुहाई दे रही है, उसका गला तो खुद गांधी परिवार ने दशकों पहले घोंट दिया था।
दीवान ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस वोट चोरी करने के साथ-साथ लोकतंत्र की हत्या करती रही है। 1946 में पहली वोट चोरी गांधी जी की देख-रेख में हुई। आजादी के बाद प्रधानमंत्री की ताजपोशी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हुआ। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 15 में से 12 प्रदेश कमेटियों ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम का प्रस्ताव रखा था, नेहरू को एक भी वोट नहीं मिला था। फिर भी महात्मा गांधी के कहने पर पटेल जी को पीछे हटाकर नेहरू को प्रधानमंत्री बना दिया गया। लोकतंत्र में बहुमत वाले को हराकर अल्पमत वाले को गद्दी सौंपना वोट चोरी का पुख्ता प्रमाण है। यहीं से कांग्रेस में परिवारवाद की नींव पड़ी।
जिला भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि 1975 में इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को बंधक बनाया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित हुआ, नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की बजाय सत्ता बचाने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने की बजाय देश में आपातकाल लगा दिया। लाखों लोगों को जेल में डाल दिया, प्रेस की आजादी छीन ली, संविधान को तार-तार कर दिया। यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी वोट चोरी और लोकतंत्र की हत्या का प्रमाण था।
उन्होंने कहा कि दशकों से देश की जनता कांग्रेस को नकार रही है लेकिन अपनी नाकामयाबी का ठीकरा EVM पर फोड़ा जाता रहा। आगामी चुनाव में हार की संभावना देख राहुल गांधी वोट चोरी का बेतुका आरोप लगा रहे हैं। सच्चाई ये है कि कांग्रेस बिहार में 36 साल, यूपी में 41 साल, तमिलनाडु में 58 साल, बंगाल में 48 साल से सत्ता से बाहर है। जनता ने इन्हें EVM के जरिए नहीं बल्कि मन से नकारा है।
विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए दीवान ने कहा कि राजनीति में झूठ को सौ बार दोहराने से सच नहीं बनता। चुनाव आयोग तथ्यों के साथ हर आरोप का जवाब दे चुका है। INDI गठबंधन की न नीति है, न नीयत। जब विकास में मुकाबला नहीं कर पाए तो भ्रम और अराजकता ही इनका आखिरी हथियार बचा है।
दीवान ने कहा – “जो पार्टी अपने ही नेता सरदार पटेल के वोट चुरा ले, जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानने से इनकार कर दे, वो आज हमें लोकतंत्र का पाठ पढ़ा रही है। राहुल गांधी कान खोलकर सुन लें, हिंदुस्तान की जनता अब सब समझती है।”
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