*राज्योत्सव केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सार्थक प्रगति, नवाचार और न्याय एवं सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक – मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा* – Chhattisgarh Top News

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*राज्योत्सव केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सार्थक प्रगति, नवाचार और न्याय एवं सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक – मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा*

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रायगढ़ 31 अक्टूबर 2025/ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने राज्य स्थापना दिवस के गौरवशाली अवसर पर शुभकामनाएं संदेश देते हुए कहा है कि मैं गर्व और उत्तरदायित्व की भावना से अभिभूत हूँ, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है। यह वर्ष केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सार्थक प्रगति, नवाचार और न्याय एवं सेवा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दिवस हमें न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की कसौटी पर अपने दायित्वों का मूल्यांकन करने का अवसर देता है। हम उन सपनों के न्यायपूर्ण और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए समर्पित हैं, जिनके लिए इस राज्य का गठन हुआ है।

न्यायपालिका की सबसे बड़ी जवाबदेही यह सुनिश्चित करना है कि न्याय की प्रक्रिया सरल और त्वरित हो, पक्षकारों को बेहतर वातावरण में त्वरित, सुलभ एवं निष्पक्ष न्याय प्राप्त हो सके, न्यायालय न्याय और विश्वास का केन्द्र बन सकें । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के द्वारा नवाचार, समावेशिता एवं उत्कृष्टता की भावना के साथ न्यायिक बुनियादी ढाँचे में उल्लेखनीय सुधार, प्रौद्योगिकीकरण के समुचित एकीकरण, विधिक सहायता तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा समयबद्ध एवं कुशल न्यायनिर्णयन के माध्यम से लंबित मामलों में कमी लाने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहें हैं। इसके साथ ही शैक्षणिक सक्रियता, समकालीन कानूनी विषय पर विमर्श, जनहित विषयों पर सार्थक हस्तक्षेपों ने समाज के प्रति संवेदनशीलता को और सशक्त बनाया है। ये प्रयास सभी के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सरोकारों के समाधान तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुविधापूर्ण वातावरण में शीघ्र एवं गुणवत्तायुक्त न्याय सुनिश्चित करने की हमारी अटूट प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि करते हैं।

मुख्य न्यायाधीश के रूप में मैं, छत्तीसगढ़ राज्य में उत्कृष्ट न्यायपालिका के निर्माण में योगदान देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने प्रशासन द्वारा न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाते हुए लंबित मामलों को उल्लेखनीय रूप से कम किया है और न्यायिक अवसंरचना को सशक्त किया है, जिससे न्याय को मजबूती मिली है। विशेष रूप से जनहित के विषयों में स्वतः संज्ञान लिया जाकर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं उत्कृष्ट न्याय का प्रयास किया जा रहा है। यह उपलब्धि उत्कृष्टता और सुधार के प्रति उच्च न्यायालय की प्रतिबद्धता का गौरवपूर्ण प्रतीक बने, और सभी के लिए न्याय, समानता तथा सम्मान के प्रति हमारी सतत् प्रयास में प्रेरणा देता रहे ।

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