*फसलों में संभावित कीट और रोग प्रकोप को लेकर किसानों को सतर्क रहने की सलाह* – Chhattisgarh Top News

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*फसलों में संभावित कीट और रोग प्रकोप को लेकर किसानों को सतर्क रहने की सलाह*

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रायगढ़, 9 अक्टूबर 2025/ इस वर्ष खरीफ सीजन की शुरुआत से ही अच्छी वर्षा के कारण धान जैसी मुख्य फसलों की बेहतर पैदावार की उम्मीद है। अब तक गत वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खेतों में पानी की उपलब्धता तो बेहतर हुई है, लेकिन अत्यधिक बारिश के चलते कुछ अन्य फसलों जैसे उड़द, मूंगफली, मूंग, मक्का एवं जल्दी पकने वाली अन्य फसल पर उचित व्यवस्था एवं देखरेख के अभाव में प्रतिकुल प्रभाव पड़ सकता है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि फसल पकने पर शीघ्र फसल की तुड़ाई एवं कटाई कर सूखे स्थानों पर सुखने हेतु फैला कर रखें या धूप में सुखने हेतु रखें। धान के खेत में हरी काई का प्रकोप दिख रहा हो तो पानी को निकाल देवें एवं खेत के जिस जगह से पानी अन्दर जाता है वहाँ पर आवश्यकतानुसार कॉपर सल्फेट को पोटली में बांध कर रखें। धान के फसल में यदि कीट व्याधी का प्रकोप दिखे तो किसान निम्नानुसार दवाओं का उपयोग नियंत्रण हेतु कर सकते हैं।
उप संचालक कृषि ने जानकारी देते हुए बताया कि भूरा माहू-पौधे के मुख्य तना से रस चूस कर पौधों को कमजोर करता है, इस कीट के प्रकोप होने पर पाईमेट्रोजिन 50 डब्ल्यू.जी. 300 ग्राम (अप्लाई, पाईमेट्रो, क्लू एवं अन्य समान उत्पाद) या डाईनेट्रान्युरान 20 एस.जी. (ओसीन, टोकन एवं अन्य समान उत्पाद) 200 ग्राम/ हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसी तरह पत्ती मोड़क (लीफफोल्डर या चितरी) यह कीट 1 से 2 पत्ती प्रति पौधा होने पर फिफरोनिल 5 एस.सी. 800 मि.ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। धान में तना छेदक के लक्षण दिखाई दे तो कर्टाप डाईक्लोराईड 50 डब्ल्यू.पी. 1 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर (काल्डेन, कैरीड, मोर्टार एवं अन्य समान उत्पाद) या क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर (फटेरा, कोरेजन, फटेगोल्ड, लेपिडोज एवं अन्य समान उत्पाद) की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर कर छिड़काव करें। साथ ही धान में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए 2-3 फिरोमेन ट्रेप प्रति एकड़ का उपयोग करें एवं प्रकोप अधिक पाये जाने पर 8-10 फिरोमेन ट्रेप का उपयोग नियंत्रण के लिए करें।
धान में गंधी बग कीट के रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8ः एस.एल. 50 मि.ली. प्रति एकड़ या थायामेथाक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यू.जी. 40 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। धान की फसल में पेनिकल माईट का प्रकोप होने पर बदरंग दाने व तने पर भूरापन देखकर पहचान किया जा सकता है। इसके निदान हेतु हेक्सीथायाजोक्स 5.45 ई.सी. (मैडन, क्युबैंक्स, माईटोलिन एवं अनय समान उत्पाद) 500 मि.ली. के साथ प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. (टिल्ट, बूस्अ, बम्पर, जिराक्स एंव अन्य समान उत्पाद) 500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या प्रोपर्राजाईट 57 ई.सी. 750 मि.ली. ़ प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. 500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। धान में झुलसा रोग के लक्षण दिखाई दे तो नाटीवो 75 डब्ल्यू.जी. 0.4 ग्राम प्रति लीटर या ट्राइसाइक्लाजोल कवकनाशी (जैसे बीम या बान एवं अन्य समान उत्पाद) 6 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में घोलकर 12-15 दिन के अंतराल में छिड़काव करें। धान में शीटब्लाइट रोग के लक्षण दिखाई दे तो हेक्साकोनाजोल नामक कवकनाशी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
इसके अतिरिक्त किसी भी फसल में किसी भी प्रकार के कीट एवं बीमारी के लक्षण/प्रभाव दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के क्षेत्रीय, विकासखण्ड, जिला स्तर के अधिकारियों एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों से संपर्क कर उचित सलाह प्राप्त कर कीट व्याधि का नियंत्रण सुनिश्चित करें।

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