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रायगढ़ जिले में समावेशी शिक्षा अंतर्गत वातावरण निर्माण का 10 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न ब्रेल लिपि व सांकेतिक भाषा से शिक्षक पढ़ा सकेंगे विद्यार्थियों को

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रायगढ़, 14 दिसम्बर 2022/ रायगढ़ जिले में समावेशी शिक्षा अंतर्गत वातावरण निर्माण का 10 दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। विदित हो कि कक्षा में समावेशी वातावरण के निर्माण अंतर्गत कक्षा में सामान्य व विशेष छात्रों में भेदभाव ना हो नि:शक्त छात्रों की सहायता उनके साथ सभी बैठने वाले करें, अधिगम प्रक्रिया में दोनों प्रकार के छात्र सहभागी हों, नि:शक्त बालक के प्रति शिक्षक व सामान्य छात्रों की संवेदनशीलता हो, इसी महती उद्देश्य को लेकर रायगढ़ जिले समावेशी शिक्षा अंतर्गत वातावरण निर्माण का दस दिवसीय प्रशिक्षण 5 दिसंबर से अनवरत चल रहा था। जिला स्तरीय समावेशी शिक्षा अंतर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के शिक्षकों का वातावरण निर्माण प्रशिक्षण जिला शिक्षा अधिकारी रायगढ़ श्री बी. बाखला की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस से लगातार दसवें दिन तक वातावरण निर्माण परीक्षण में जिले भर से आए 200 शिक्षकों ने हिस्सा लिया था। उक्त प्रशिक्षण में 5 दिन ब्रेल लिपि आधारित एवं 5 दिन सांकेतिक भाषा पर प्रशिक्षण हुआ जिसके अंतर्गत दिव्यांग विद्यार्थियों को सामान्य विद्यार्थियों के साथ कैसी शिक्षा प्रदान किया जाए इस पर जोर देते हुए प्रत्येक शिक्षकों को संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।
समापन समारोह में जिला शिक्षा अधिकारी रायगढ़ श्री बी बाखला ने समावेशी शिक्षा अंतर्गत वातावरण निर्माण की प्रक्रिया में शिक्षकों की भूमिका के बारे में वक्तव्य देते हुए कहा कि समावेशी शिक्षा में एक अध्यापक अपने छात्रों को मानसिक शारीरिक मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है ताकि सभी छात्रों का पूर्ण विकास हो सके। जिला मिशन समन्वयक श्री नरेंद्र चौधरी ने कहा कि एक सामान्य शिक्षक अपनी कक्षा में सभी प्रकार के बच्चों के लिए एक मार्गदर्शक बने, उसका उत्तरदायित्व न सिर्फ कक्षा के भीतर हो बल्कि बाहर भी अनंत तक हो, समावेशी शिक्षा इस बात को भी लागू करती कि सामान्य विद्यालयों में प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता पूरी हो। एपीसी श्री भुनेश्वर पटेल ने कहा कि इस शिक्षा व्यवस्था में बालकों का मानसिक विकास एवं आत्म सम्मान की भावना का विकास अच्छी तरह से होता है। इस शिक्षण व्यवस्था में असमर्थ बालकों में प्यार दयालुता समायोजन सहायता भाईचारा आदि ऐसे सामाजिक गुणों का विकास होता है। एपीसी श्री आलोक स्वर्णकार ने कहा कि समावेशी शिक्षा मानसिक व शारीरिक रूप से बाधित बालक तथा सामान्य बालक दोनों साथ साथ सामान्य कक्षा में शिक्षा ग्रहण करते हैं। इससे अपंग बालकों को कुछ अधिक सहायता प्रदान की जाती है। इस प्रकार समावेशी शिक्षा अपने बालकों के पृथक्करण के विरोधी व्यावहारिक समाधान है। प्रशिक्षण के समापन पर आभार व्यक्त करते हुए बीआरसी रायगढ़ श्री मनोज अग्रवाल ने कहा कि समावेशी शिक्षा समाज के हर स्तर पर एक स्वस्थ सामाजिक वातावरण और समाज में विकलांग और सामान्य बच्चों के बीच संबंध बनाने में सहायक है, यह समाज में एक दूसरे के बीच की दूरी को कम करता है और आपसे सहयोग की भावना प्रदान करता है।

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