बरमकेला: आजादी के पश्चात भी मुलभुत सुविधाओं से वंचित गांव.. राजनेताओं के उपेक्षा से पीड़ित बोइरडीहा पारा पहुंचकर जिला पंचायत सदस्य विलास सारथी ने ग्रामीणों की सुनी फ़रियाद…. – Chhattisgarh Top News

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बरमकेला: आजादी के पश्चात भी मुलभुत सुविधाओं से वंचित गांव.. राजनेताओं के उपेक्षा से पीड़ित बोइरडीहा पारा पहुंचकर जिला पंचायत सदस्य विलास सारथी ने ग्रामीणों की सुनी फ़रियाद….

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बरमकेला: आजादी के पश्चात भी मुलभुत सुविधाओं से वंचित गांव.. राजनेताओं के उपेक्षा से पीड़ित बोइरडीहा पारा पहुंचकर जिला पंचायत सदस्य विलास सारथी ने ग्रामीणों की सुनी फ़रियाद….

जगन्नाथ बैरागी

सारंगढ़: देश को आजादी मे 75 वर्ष से अधिक होने के पश्चात भी पूर्व विकसित रायगढ़ जिले और वर्तमान नवगठित सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले मे एक ऐसा गांव जहाँ किसी बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति को कंधे से उठाकर ले जाने ग्रामीण मजबूर हों तो सुनने पर सहसा यकीन नही होता। लेकिन प्रशासनिक विकास के दावे को खोखला साबित करते बरमकेला विकास खंड स्थित खम्हरिया पंचायत कमलापानी बोइरडीहा पारा अभी भी मुलभुत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। ना तो पूर्व जनप्रतिनिधियों ने ना ही प्रशासनिक अमले ने इस पर ध्यान दिया या यून कहें बार बार विनती के बाद भी नदरअंदाज करते रहे। जब उक्त बात स्थानोय मीडिया की सुर्खियाँ भी बटोरी लेकिन कुम्भकर्ण की नींद सोये तथाकथित बड़े अधिकारियों के कानों मे जूँ तक नही रेंगी ऐसा ग्रामीणों का कहना है।

विलास सारथी ने अपने मद से पुलिया निर्माण का दिलाया यकीन –

जिला पंचायत सदस्य के कानो मे ग्रामीणों की परेशानी की बात सुनते ही कमलापानी के बोइरडीहा पारा के ग्रामीणों के पास पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दयनीय स्थिति को देखते अपने मद से यथा संभव मदद की बात कही। ग्रामीणों ने सडक और पुलिया निर्माण की बात कही, जिस पर उन्होंने पुलिया हेतु अपने मद राशि से निर्माण की बात कही। विलास सारथी के पुलिया निर्माण की बात सुनते ही बुजुर्गों और महिलाओं की खुशी का अंदाजा नही रहा। विलास सारथी ने ग्रामीणों को बताया की सड़क निर्माण के लिए बड़ी राशि की जरूरत पड़ती है जिसके लिए वे अपने विधायक और उच्च जनप्रतिनिधियों से भी बात करेंगी।

आखिर कब बनेगी सड़क –

यूँ तो केंद्र और राज्य सरकार दोनों कागजों और इस्तेहारों मे विकास की बड़ी बड़ी इबादत गढ़ रहे हैँ लेकिन आजादी के 75 वर्ष बाद भी जनता की हक सड़क के लिए कोई तरसे तो ये सबसे बड़ी गंभीर बात है। अब देखना दिलचस्प होगा की लोकतंत्र मे सर्वोपरि जनता जनार्दन को उनके हक की सड़क कब मिल पाती है।

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