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आयुर्वेद अपनाएं निरोगी जीवन पाए-डॉ.अजय नायक

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रायगढ़, 14 अक्टूबर 2022/ आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेन्टर के प्रभारी एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ.अजय नायक ने बताया कि मनुष्य आयुर्वेद शैली को अपने जीवन का हिस्सा बनाने लगे है जैसे दिनचर्या रितु चर्या आहार विधि योग प्रणाली पंचकर्म इत्यादि इस चिकित्सा पद्धति में नकारात्मक प्रभाव नहीं के बराबर है। आज हर घर में आयुर्वेद से संबंधित कुछ ना कुछ होता है लगभग सभी के घरों में हर्बल प्रोडक्ट उपयोग करते हैं। पहले समय में जब किसी को बुखार, खांसी होती थी तो लौंग, इलायची, अदरक, काली मिर्च, तुलसी के पत्ते का काढ़ा बनाकर पीते थे और ठीक हो जाते थे। गर्म पानी का उपयोग करने से गले में छोटी-मोटी परेशानी रहती है वह दूर हो जाती है सरसों के तेल में लहसुन को उबालकर थोड़ा गुनगुना कर कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता था। जब शरीर पर कोई चोट लगती है या हड्डियों से संबंधित छोटी-मोटी परेशानी होती है तो दूध में हल्दी डालकर पीते थे जिससे आराम मिलता था। दांतों में कोई समस्या होती थी तो नीम की दातुन का उपयोग करते थे, दांतों में दर्द होता था तो लौैंग चबाते थे, जिससे आराम मिलता था। पेट में दर्द होने पर घी और हींग का नाभि पर लेप करते थे एवं गुनगुने पानी में मेथी डालकर हल्का गुनगुना करके पीते थे। अनिद्रा संपूर्ण शरीर दर्द सिर दर्द के लिए या थकान महसूस होती थी तो शरीर पर तेल मालिश करके आराम का अनुभव कर लेते थे त्वचा के रोगों में नीम का प्रयोग करते थे नीम के पत्तों को पानी में उबालकर फिर उसे साफ करके स्नान करते थे। अगर बच्चे का शारीरिक विकास नहीं होता था तो दूध दही सही मात्रा में सेवन करवा करके उससे उसके शरीर को हष्ट पुष्ट बनाने का काम करते थे। शहद, देशी गाय का घी, मौसमी फल, मौसमी सब्जी इत्यादि का प्रयोग हर घर में हमेशा होता था जिससे लोग बहुत कम बीमार पड़ते थे। सब कुछ प्राकृतिक स्रोत होता था और मनुष्य स्वस्थ रहते थे आज एक बार फिर हमें वापस आयुर्वेद को अपनाने की जरूरत है निरोगी जीवन जीने के लिए आयुर्वेद बहुत जरूरी है।
समय के अनुसार परिवर्तन होना स्वाभाविक सी बात है बीच में एक ऐसा दौर आया जहां पर इंसान प्राकृतिक विधाओं से दूर होता गया जिससे वह दिन प्रतिदिन रोगों से ग्रस्त होते चला गया। लेकिन आजकल धीरे-धीरे फिर से उसी जीवन शैली की अपना रहे है एवं प्राकृतिक संपदा का उपयोग कर लोग बढऩे लगे हैं एवं आयुर्वेद को अपनाने लगे हैं। खास करके यह देखा गया कि कोरोना के समय अधिकांश लोग आयुर्वेदिक को अपनाएं हैं अगर हम उत्तम स्वास्थ्य चाहते हैं तो हमें आयुर्वेद को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाना होगा योग और आयुर्वेद में गहरा संबंध है हमें अपनी दिनचर्या में योग को नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। हर दिन मनुष्य को आधा घंटा योगासन करना चाहिए तथा अपने शरीर को स्वस्थ रखने का प्रयास करना चाहिए इसलिए आयुर्वेद अपनाकर स्वास्थ्य जीवन पाए।

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